Saturday, 12 May 2007

'कहो बडे भईया कहा हो'

जब से उत्तर प्रदेश चुनावो के रिजल्ट आये है तभी से हमेशा टेलीविजन के परदे पर छाये रहने वाले अपने छोटे भईया आजकल गायब है और ना ही अपने बडे भईया अब वो दम और जुर्म वाले एड लेकर आ रहे है । हमारे दर्शको को भी मज़ा नही आ रहा है पहले लालू जी लोगो को हंसाने का काम करते थे बाद में अपने छोटे भईया ने ये जिम्मेदारी संभाल ली । चुनाव के पहले तो वो पूतना ओर क्या-क्या नाम जडते रहे लेकिन जैसे ही जीं निकला कि भाई लोगो कि सिट्टी-पित्ती गुम । भाई लोग अब उत्तर प्रदेश से बाहर कहीँ ठौर तलाशने चल पडे । ऐसे भी फिल्म नगरी मुम्बई में बडे भईया के पास कई आलिशान बंगले है ही जब तक संकट रहेगा बडे भैया के यहा ही रह लेंगे । उन्हें क्या पडी है अपने वोटरों कि । पहले अपनी जान तो बचाए । कहते भी है की ' जान बची तो लाखों पायें' ।

पिछले तीन सालों में जिस तरह से आपने उत्तर प्रदेश के विकास में योगदान दिया था तो ये दिन तो आना ही था अब कराओ बडे भईया से अपने पक्ष में प्रचार । या फिर ले आओ हसीं फिल्मी हेरोइनो को अपने प्रचार मे । वैसे भी पुरे देश ने देखा था आख़िरी चरण के चुनाव प्रचार के लिए आप लखनऊ कि रैली में कमसीन बार बालाओं को ।। अब भैया आज का वोटर तो बस आप लोगो कि कमजोर नस पकड़ बैठा है । उसे तो पता है कि आप उसे चुनाव के दिन तक ही शराब पिला सकते है , बार बालाओं के नाच दिखा सकते है । लेकिन यहीं खा ना गच्चा , जनता ने ऐसा दाव खेला कि सब भई लोग चारो खाने चीत । अपने धोबिया पछार वाले नेता भी नही समझ पाये । ये तो बिल्कुल अपने अटल जी वाली 'फील गूड ' वाली कहानी ही दुबारा हो गयी ।

5 comments:

अनूप शुक्ल said...

सत्य वचन!

परमजीत बाली said...

जैसी करनी वैसी भरनी।

sunita (shanoo) said...

बहुत अच्छे! सजीव चित्रण,..

Sanjay Tiwari said...

राजनीति में छलावा लंबे समय तक नहीं चलता। मायावती उस रास्ते जाएंगी तो एक दिन उनका भी यही हश्र होगा।

Mired Mirage said...

सही कहा । किन्तु राजनीति में यह सब होता रहता है ।
घुघूती बासूती