भले ही हम कई साल महिला सशक्तिकरण के नाम पर मना ले, और mahilawon के kalyan के नाम पर roj नए sarkari karyakram देखते hon, लेकिन स्थिति सुधरने में अभी भी वक्त लगने वाला है। कुछ यही सामने आया है वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम कि 'गेप इंडेक्स रिपोर्ट' में। इस रिपोर्ट कि माने तो भारत आर्थिक मामलों में, महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा भेदभाव करने वाले 10 मुल्कों में शामिल है। यही आर्थिक, राजनीतिक, शिक्षा और स्वास्थ्य में समानता के मामले में भारत 128 देशों में 114 वें नंबर पर है।
महिलाओं को आर्थिक मसलों में भागीदारी और मौके देने के मामले में तो स्थिति और भी खराब है। इसमें भारत १२२वे नंबर पर है। इस इंडेक्स में भारत से नीचे बहरीन, कैमरुन, इरान, ओमान, टर्की, सऊदी अरब, नेपाल, पाकिस्तान का नाम है। अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका और फ्रांस भारत से बहुत बेहतर स्थिति में हैं। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ५९.4 फीसदी महिला-पुरुष के बीच समानता है। जबकि आर्थिक मसलों पर भागीदारी और मौके देने के मामले में यह समानता घटकर ३९.8 फीसदी हो गई है। आर्थिक मामलों में इतने बुरे हालात के बावजूद राजनीतिक सशक्तीकरण के मामले में भारत 21 वें नंबर पर है। 106 महिलाएं संसद में हैं, 118 मंत्री पद पर हैं और कई राज्यों की प्रमुख महिलाएं हैं। आर्थिक समानता इंडेक्स निर्धारित करने के लिए चार पैमाने रखे गए। नौकरी में हिस्सेदारी, समान काम के लिए मिलने वाला वेतन, कानून बनाने में भागीदारी, उच्च अधिकारी, मैनेजर और तकनीकी कर्मचारी। समान काम के लिए समान वेतन देने के मामले में भारत की स्थिति बेहतर हैं। 128 देशों में भारत का नंबर 59 वां है। महिलाओं को आर्थिक हिस्सेदारी और मौके देने के मामले में मोजांबीक सबसे बेहतर स्थिति में है। यहां ७९.7 फीसदी जेंडर इक्वेलिटी है। इसके बाद फिलिपीन, घाना और तंजानिया का नंबर आता है।
कहते हैं भारत विविधताओं से भरा देश है, विविध लोग...विविध नज़ारे और विविध प्रकार की बातें.....हर बार जिंदगी का नया रूप और नई तस्वीर....लेकिन सब कुछ हमारी अपनी जिंदगी का हिस्सा...इसलिए बिल्कुल बिंदास...
Monday, 12 November 2007
नंदीग्राम के अखाड़े से!
इधर kaii दिनों से नंदीग्राम से लगातार खबरें आ रही हैं। खुद को आम आदमी का शुभचिंतक कहने वाले माकपा के लोग किसानों के खिलाफ लड़ रहे हैं। बड़ी-बड़ी हस्तियाँ उनकी में कूद पड़ी हैं। ममता बनर्जी, मेधा पाटकर, अपर्णा सेन, रितुपर्णो सेन, दबे जबान में कांग्रेस के लोग, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और ना जाने कौन-कौन। अब लेफ्ट के बाक़ी सहयोगी भी माकपा के खिलाफ बोलने लगे हैं। प्रधानमंत्री तक को कहना पडा है कि स्थिति चिंताजनक है।
राजनीति कि भाषा जो भी कहे , नंदीग्राम के किसानों के लिए ये अस्तित्व कि लड़ाई है। उसके लिए पिछले कुछ महीनों में उन्होने न जाने कितनी जाने गवाईं हैं। जाने अब भी जा रही है। कोर्ट तक को कहना पड़ा कि पानी सर के ऊपर जा रहा है। बंगाल में उन्ही वामदलों कि सरकार है, जिन्होनें गुजरात दंगों के खिलाफ जमकर बवाल काटा था। मोदी को हिटलर और ना जाने क्या-क्या कहा था। आज वामपंथी धरे के वो सारे बुध्धि भी चुप हैं जो गुजरात दंगों पर खुद आगे आकार बवाल कट रहे थे। कोर्ट और ना जाने कहाँ-कहाँ तक गए थे। आज उनको कोई मौत विचलित नहीं करती। क्युकी नंदीग्राम में बह रहे खून से उनकी राजनीति नहीं चमकती। यहाँ लड़ाई का न तो कोई जातिया आधार है, और ना ही सांप्रदायिक। यहाँ कि लड़ाई किसानों कि है। जो अपने अस्तित्व कि लडाई लड़ रहे हैं।
राजनीति कि भाषा जो भी कहे , नंदीग्राम के किसानों के लिए ये अस्तित्व कि लड़ाई है। उसके लिए पिछले कुछ महीनों में उन्होने न जाने कितनी जाने गवाईं हैं। जाने अब भी जा रही है। कोर्ट तक को कहना पड़ा कि पानी सर के ऊपर जा रहा है। बंगाल में उन्ही वामदलों कि सरकार है, जिन्होनें गुजरात दंगों के खिलाफ जमकर बवाल काटा था। मोदी को हिटलर और ना जाने क्या-क्या कहा था। आज वामपंथी धरे के वो सारे बुध्धि भी चुप हैं जो गुजरात दंगों पर खुद आगे आकार बवाल कट रहे थे। कोर्ट और ना जाने कहाँ-कहाँ तक गए थे। आज उनको कोई मौत विचलित नहीं करती। क्युकी नंदीग्राम में बह रहे खून से उनकी राजनीति नहीं चमकती। यहाँ लड़ाई का न तो कोई जातिया आधार है, और ना ही सांप्रदायिक। यहाँ कि लड़ाई किसानों कि है। जो अपने अस्तित्व कि लडाई लड़ रहे हैं।
Saturday, 10 November 2007
नंदीग्राम का भी अपना इतिहास होगा !
आने वाले समय में जब भारत का इतिहास लिखा जाएगा तब नंदीग्राम का भी एक पन्ना होगा। एक ऐसी जगह जगह लोग अपनी जमीन के लिए लड़ते रहे, लगातार लोगों ने संघर्ष किया। केवल सरकारी मशिनरी से नही बल्कि पार्टी के कार्यकार्ताओं से भी। ये लड़ाई भी कुछ दिनों कि नही बल्कि महीनों तक चली और अब भी चल रही है। यहाँ आकर सरकारी तंत्र फेल है, और वामपंथ का वो नारा भी कि लोगों कि भलाई उसे सत्ता से ज्यादा प्यारी है। नंदीग्राम में लड़ने अपनी जमीन के लिए लड़ने वाले कोई पूंजीवादी या जमींदार नहीं बल्कि आम किसान हैं, जिनकी राजनीति वाम दल करते आये हैं। आज यही किसान इन पार्टी के कार्यकार्ताओं से लड़ रहे हैं। यही वामपंथी दल के लोग पाकिस्तान में मार्शल ला लगाने का विरोध कर रहे हैं और बुश को भारत का इतिहास समझाने में लगे हुए हैं। लेकिन उन्हें अपने लोगों के खिलाफ लड़ाई कर रहे अपने कार्यकार्ताओं को समझाने का समय नहीं है।
कई महीने हो चुके हैं। केन्द्र में सत्ता बचाने के लिए कुछ भी करने वाली कांग्रेस कि सरकार (नारा- कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ) ने भी कुछ नही किया, और ना ही सत्ता कि दूसरी दावेदार भाजपा ने कुछ किया। किसी को किसानों कि लड़ाई से कुछ लेना-देना नही हैं। लेकिन नंदीग्राम के किसान अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। और आख़िर तक लडेंगे।.......वो अपना इतिहास खुद लिखेंगे, क्युकी यही लड़ाई उनके अस्तित्व का भविष्य तय करेगा । यहीं से उनका इतिहास लिखा जाएगा।
कई महीने हो चुके हैं। केन्द्र में सत्ता बचाने के लिए कुछ भी करने वाली कांग्रेस कि सरकार (नारा- कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ) ने भी कुछ नही किया, और ना ही सत्ता कि दूसरी दावेदार भाजपा ने कुछ किया। किसी को किसानों कि लड़ाई से कुछ लेना-देना नही हैं। लेकिन नंदीग्राम के किसान अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। और आख़िर तक लडेंगे।.......वो अपना इतिहास खुद लिखेंगे, क्युकी यही लड़ाई उनके अस्तित्व का भविष्य तय करेगा । यहीं से उनका इतिहास लिखा जाएगा।
Friday, 9 November 2007
आपको 'आरक्षित जरूरतमंद' क्यों नहीं दिखते प्रधानमंत्री जी!
प्रधानमंत्री ने सब्सिडी पर चिंता जताई
{योजना आयोग की बैठक में मनमोहन सिंह ने सब्सिडी पर चिंता जाहिर की, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेट्रोलियम पदार्थो, कृषि और उर्वरकों पर बढ़ती सब्सिडी को लेकर चिंता व्यक्त की। योजना आयोग की पूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा,'' हमें खाद्य, उर्वरक और अब पेट्रोलियम पदार्थो पर बढ़ते सब्सिडी के दबाव को कम करने की ज़रूरत है।'' उनका कहना था कि केवल इस साल इन तीनों मदों पर लगभग एक लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाएगी।}
------ प्रधानमंत्री जी का दयां मैं इस बात पर दिलाना चाहूँगा कि देश का अरबो रुपया आरक्षण के नाम पर वो लोग चबा रहे हैं, जिन्हें उसकी जरूरत नही है। आरक्षण कि जिन्हें जरूरत है उन्हें तो उसका फैदा कम ही होता है, लेकिन जो लोग जागरूक है और अब मालदार भी वो उसका फैदा उठा रहे हैं, चलते हैं गाड़ियों में, और उनके बच्चे भी अलग से गाडिया लेकर चलते हैं, लेकिन उन्हें स्कूल, कालेज, परीक्षा , यहाँ तक कि पैदा होने के लिए भी पैसा मिल रहा है।
अब आपको मैं एक उदाहर्ण देकर बताना ठीक रहेगा। मेरा एक दोस्त है, उसके पिता जी आरक्षण कि सिढी चदकर आज बैंक में अच्छे पद पर हैं, वो लड़का सब तरह से संपन है। लेकिन रेलवे कि परीक्षा के लिए उसे न तो फॉर्म भरने का पैसा देना padtaa है, और naa ही देश में kahi jaane के लिए सीट आरक्षित कराने का पैसा। परीक्षा तो उससे निकलने वाला तो है नही, लेकिन उसका कहना है कि देश भर में फ्री में घूमने का इससे अच्छा मौका क्या हो सकता है। अब प्रधानमंत्री जी जरा सोचिये कि क्या ये फिजूलखर्ची नही है। क्या इसे रोकने पर आपको नही सोचना चाहिऐ। और किसानों कि सब्सिडी रोक कर भी आप क्या कर लेंगे । अगर आप रोकेंगे तो वो फर्जी कागज बनाकर गरीब बने रहेंगे, आख़िर आपके नेतावो और अधिकारियो के लिए भी तो यही फैदेमंद रहेगा।
{योजना आयोग की बैठक में मनमोहन सिंह ने सब्सिडी पर चिंता जाहिर की, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पेट्रोलियम पदार्थो, कृषि और उर्वरकों पर बढ़ती सब्सिडी को लेकर चिंता व्यक्त की। योजना आयोग की पूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा,'' हमें खाद्य, उर्वरक और अब पेट्रोलियम पदार्थो पर बढ़ते सब्सिडी के दबाव को कम करने की ज़रूरत है।'' उनका कहना था कि केवल इस साल इन तीनों मदों पर लगभग एक लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाएगी।}
------ प्रधानमंत्री जी का दयां मैं इस बात पर दिलाना चाहूँगा कि देश का अरबो रुपया आरक्षण के नाम पर वो लोग चबा रहे हैं, जिन्हें उसकी जरूरत नही है। आरक्षण कि जिन्हें जरूरत है उन्हें तो उसका फैदा कम ही होता है, लेकिन जो लोग जागरूक है और अब मालदार भी वो उसका फैदा उठा रहे हैं, चलते हैं गाड़ियों में, और उनके बच्चे भी अलग से गाडिया लेकर चलते हैं, लेकिन उन्हें स्कूल, कालेज, परीक्षा , यहाँ तक कि पैदा होने के लिए भी पैसा मिल रहा है।
अब आपको मैं एक उदाहर्ण देकर बताना ठीक रहेगा। मेरा एक दोस्त है, उसके पिता जी आरक्षण कि सिढी चदकर आज बैंक में अच्छे पद पर हैं, वो लड़का सब तरह से संपन है। लेकिन रेलवे कि परीक्षा के लिए उसे न तो फॉर्म भरने का पैसा देना padtaa है, और naa ही देश में kahi jaane के लिए सीट आरक्षित कराने का पैसा। परीक्षा तो उससे निकलने वाला तो है नही, लेकिन उसका कहना है कि देश भर में फ्री में घूमने का इससे अच्छा मौका क्या हो सकता है। अब प्रधानमंत्री जी जरा सोचिये कि क्या ये फिजूलखर्ची नही है। क्या इसे रोकने पर आपको नही सोचना चाहिऐ। और किसानों कि सब्सिडी रोक कर भी आप क्या कर लेंगे । अगर आप रोकेंगे तो वो फर्जी कागज बनाकर गरीब बने रहेंगे, आख़िर आपके नेतावो और अधिकारियो के लिए भी तो यही फैदेमंद रहेगा।
Saturday, 3 November 2007
ऑर्कुट अकाउंट के लिए हो सकता है जेल, हुआ भी है!
मैं आपको जो खबर बताने जा रहा हूँ वो हम सब इंटरनेट को चबाने वाले भाई लोगों के लिए बहुत अहम है। खबर ऑर्कुट कि है। इस खबर का मतलब हम सब ऐसे लोगों से है जो ऑर्कुट पर जाते है और बेबाक तरीके से लोगो और ग्रुप को जोड़ने का काम करना अपना हॉबी मानते हैं। मैं निचे जो ह-बहु देने जा रह हूँ, संजय लीला भंसाली या मधुर भंडारकर कि किसी आने वाली फिल्म कि स्क्रिप्ट नहीं बल्कि नवभारत तिमेस कि वेबसाइट पर लगी एक खबर है। किसी भी दिन पुलिस आपके घर पहुंच सकती है और आप भी कैलाश भी कि तरह कोई टोपी पहना दिए जाओगे ..........................................
खबर -----
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ऑर्कुट अकाउंट के लिए 50 दिन जेल में
31 अगस्त की अल सुबह लक्ष्मण कैलाश बेंगलुरु में अपने घर में गहरी नींद में थे। अचानक 8 पुलिसवाले उनके घर पहुंचे। पुणे से आए ये पुलिसवाले जोर-जोर से उनका दरवाजा खटखटाने लगे। कैलाश ने दरवाजा खोला तो इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी एक्ट उनके उनींदे से मुंह पर मार दिया गया।
पुलिसवालों ने उनसे कहा कि कपड़े पहनो, तुम्हें शिवाजी के अपमान के आरोप में हम पुणे ले जाएंगे। कैलाश ने कहा कि वह तो किसी शिवाजी को नहीं जानते।
पुलिस ने बताया कि बात छत्रपति शिवाजी की हो रही है और उनकी एक अपमानजनक तस्वीर ऑर्कुट पर अपलोड की गई है। उसी वेबसाइट का पीछा करते-करते वे कैलाश तक पहुंचे थे।
कैलाश की बात नहीं सुनी गई और उन्हें पुणे ले जाया गया। कैलाश को सलाखों के पीछे डाल दिया गया। बाद में उन्हें पता चला कि उन्हें पुणे में नवंबर 2006 में हुए दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
तब कुछ राजनीतिक दलों ने साइबर कैफे बंद करवा दिए थे और उपद्रव मचाया था क्योंकि कथित रूप से शिवाजी के एक चित्र का मजाक उड़ाया गया था।
कुछ दिन बाद पुलिसवालों ने दावा किया कि उन्होंने असली अपराधियों को पकड़ लिया है। उसके तीन हफ्ते बाद कैलाश को रिहा किया गया। तब तक वह जेल में 50 दिन गुजार चुके थे। एचसीएल में काम करने वाले 26 साल के कैलाश को तब समझ में आया कि उनका कुसूर था ऑर्कुट में उनका अकाउंट।
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खबर -----
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ऑर्कुट अकाउंट के लिए 50 दिन जेल में
31 अगस्त की अल सुबह लक्ष्मण कैलाश बेंगलुरु में अपने घर में गहरी नींद में थे। अचानक 8 पुलिसवाले उनके घर पहुंचे। पुणे से आए ये पुलिसवाले जोर-जोर से उनका दरवाजा खटखटाने लगे। कैलाश ने दरवाजा खोला तो इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी एक्ट उनके उनींदे से मुंह पर मार दिया गया।
पुलिसवालों ने उनसे कहा कि कपड़े पहनो, तुम्हें शिवाजी के अपमान के आरोप में हम पुणे ले जाएंगे। कैलाश ने कहा कि वह तो किसी शिवाजी को नहीं जानते।
पुलिस ने बताया कि बात छत्रपति शिवाजी की हो रही है और उनकी एक अपमानजनक तस्वीर ऑर्कुट पर अपलोड की गई है। उसी वेबसाइट का पीछा करते-करते वे कैलाश तक पहुंचे थे।
कैलाश की बात नहीं सुनी गई और उन्हें पुणे ले जाया गया। कैलाश को सलाखों के पीछे डाल दिया गया। बाद में उन्हें पता चला कि उन्हें पुणे में नवंबर 2006 में हुए दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
तब कुछ राजनीतिक दलों ने साइबर कैफे बंद करवा दिए थे और उपद्रव मचाया था क्योंकि कथित रूप से शिवाजी के एक चित्र का मजाक उड़ाया गया था।
कुछ दिन बाद पुलिसवालों ने दावा किया कि उन्होंने असली अपराधियों को पकड़ लिया है। उसके तीन हफ्ते बाद कैलाश को रिहा किया गया। तब तक वह जेल में 50 दिन गुजार चुके थे। एचसीएल में काम करने वाले 26 साल के कैलाश को तब समझ में आया कि उनका कुसूर था ऑर्कुट में उनका अकाउंट।
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Friday, 2 November 2007
अनंत सिंह- लालू राज से नीतिश राज का सफर
हाल के कुछ सालों में अनंत सिंह के बारे में बहुत कुछ देखा-सुना । यही कोई दो-तीन साल पहले ए-के ४७ लेकर नाचते टीवी चैनलों ने दिखाया था । तबसे अनंत सिंह का कद बढता गया है, बिहार में। सच में देखा जाये तो अनंत सिंह को बिहार के वर्तमान सरकार नीतिश कुमार का छोटा सरकार यूं ही नही कहा जाता । बिहार और देश कि राजनीति में जैसे-जैसे नीतिश का कद-बढता गया अनंत सिंह भी तेज़ी से बिहार कि राजनितिक पटल पर छाते गए। हमने जब पहली बार अनंत सिंह के बारे में सूना तो ज्यादा वक्त नही लगा समझने में कि किस प्रजाति कि हस्ती होंगे भाई साहब । बिहार कि उस पीढ़ी के लिए ये मुश्किल काम नही है, जो शहाबुद्दीन, आनंद मोहन और पप्पू यादव को देखते हुए बड़ा हुआ है।
अनंत सिंह ने मीडिया वालों को पित्वाया , इस पर कोई हैरानी नही हुई। कारन कि अनंत सिंह से जो इससे अच्छे व्यवहार कि उम्मीद करे वो पागल ही कहा जाएगा। लेकिन अपने लालू जी ने मौका नही गवान्या । कहने लगे नीतिश राज में कुशासन है। अब लालू जी ऐसा तो है नही कि आप के सारे लोग दूध के धुले हैं, अब अपने दोनो साले साहब लोगों को ही देख लीजिये। ये भी नही है कि अनंत सिंह नीतिश राज में ही आगे बढे हैं। उनका ज्यादा अपराध तो लालू राज में ही हुआ था । अब आप उस समय क्यों नही काबू किये। करते भी कैसे, पहले अपने लोगों को भी तो बंद करना पड़ता।
अनंत सिंह ने मीडिया वालों को पित्वाया , इस पर कोई हैरानी नही हुई। कारन कि अनंत सिंह से जो इससे अच्छे व्यवहार कि उम्मीद करे वो पागल ही कहा जाएगा। लेकिन अपने लालू जी ने मौका नही गवान्या । कहने लगे नीतिश राज में कुशासन है। अब लालू जी ऐसा तो है नही कि आप के सारे लोग दूध के धुले हैं, अब अपने दोनो साले साहब लोगों को ही देख लीजिये। ये भी नही है कि अनंत सिंह नीतिश राज में ही आगे बढे हैं। उनका ज्यादा अपराध तो लालू राज में ही हुआ था । अब आप उस समय क्यों नही काबू किये। करते भी कैसे, पहले अपने लोगों को भी तो बंद करना पड़ता।
Tuesday, 30 October 2007
ये वक्त किसी का नहीं होता भैया!
ये वक्त भी बड़ा अजीब चीज है भाई। कब किसे जमीन पर लाकर पटक दे और कब किसे कहाँ ले जाकर बैठा दे, कुछ भी गेस करना संभव नही हैं। ये समय की ही बात है कि अब कल तक कर्णाटक के मुख्यमंत्री रहे कुमारस्वामी जी को उपमुख्यमंत्री पद से संतोष करना पद रह हैं। वो तो वक्त बुरा हैं वर्ना वो कहाँ मानने वाले थे। आख़िर उनके पापा जी की चतुराई भी उनके काम नहीं आ सकी।
अब अपनी उमा भारती जी को देख लीजिये । जब भाजपा से गयी थी तब कह रहीं थी कि मैं ही भाजपा ह लेकिन अब जाकर उन्हें भी लग रह होगा कि भाई मैं तो कुछ हूँ ही नही , अपने नटवर सिंह जी को ही देख लीजिये । हर जगह सुइट पहने हुए नजर आ जाते थे, आजकल दिखाई ही नही दे रहे हैं। अब भैया सुपर पॉवर से टक्कर लोगे तो नपोगे हीं. सब वक्त का खेल है, अपने दीवार भैया को ही देख लीजिये अभी कुछ ही दिन पहले टीम के कप्तान थे, कप्तानी उन्होने ये कहते हुए छोड़ दी कि बल्लेबाजी पर ध्यान दूंगा लेकिन अब वक्त ऐसा आया कि टीम से ही उन्हें bahar kar दिया गया। अरे भाई niras क्यों होते हो apke समय में दादा को भी तो बाहर किया गया था। अब वक्त ही ऐसा है तो क्या कर सकते हैं भाई।
अब अपनी उमा भारती जी को देख लीजिये । जब भाजपा से गयी थी तब कह रहीं थी कि मैं ही भाजपा ह लेकिन अब जाकर उन्हें भी लग रह होगा कि भाई मैं तो कुछ हूँ ही नही , अपने नटवर सिंह जी को ही देख लीजिये । हर जगह सुइट पहने हुए नजर आ जाते थे, आजकल दिखाई ही नही दे रहे हैं। अब भैया सुपर पॉवर से टक्कर लोगे तो नपोगे हीं. सब वक्त का खेल है, अपने दीवार भैया को ही देख लीजिये अभी कुछ ही दिन पहले टीम के कप्तान थे, कप्तानी उन्होने ये कहते हुए छोड़ दी कि बल्लेबाजी पर ध्यान दूंगा लेकिन अब वक्त ऐसा आया कि टीम से ही उन्हें bahar kar दिया गया। अरे भाई niras क्यों होते हो apke समय में दादा को भी तो बाहर किया गया था। अब वक्त ही ऐसा है तो क्या कर सकते हैं भाई।
Monday, 29 October 2007
क्यों मार रहें हैं लोग अपनों को!
आज मुझे कई खबरें ऐसी मिलती गयी जिसने मुझे परिवार और अपनेपन के बारे में कई सवाल दे दिए। भारत जैसे देश में इस तरह कि कई खबरें एक साथ आना बरी हैरान कर देने वाली रही।
सुबह टीवी खोलते ही मुम्बई से एक खबर आई कि भाई ने संपती के विवाद में बहन को ६ गोलियाँ मरी। (क्या इन दोनों के बिच कभी प्रेम नही रह होगा, फिर कैसे भाई ने बहन पर गोली चालला dii)
दूसरी खबर डेल्ही से थी, पत्नी ने पति का कत्ल कर दिया था।
तीसरी खबर फिर मुम्बैं से थी , बाप ने अपने दो बेटों कि हत्या कर खुदकुशी कर ली, वो अपनी पत्नी कि बेवफाई से परेशान था।
अगली खबर फरीदाबाद से थी, माँ ने बेटे की हत्या कर दी थी,
न जाने ऐसी कई खबरें देश भर में आज दिन भर होती रही होगी। सोचने वाली बात है ऐसा हो क्यों रहा है । क्या हम इतने लालची हो गए हैं कि अब रिश्तों कि क़द्र नही कर सकते, अगर ऐसा नही कर सकते तो फिर क्यों नही पश्चिमी देशों के लोगो की तरह रिश्तों के बारे में हम खुलकर अपने विचार क्यों नही बना पाते।
सुबह टीवी खोलते ही मुम्बई से एक खबर आई कि भाई ने संपती के विवाद में बहन को ६ गोलियाँ मरी। (क्या इन दोनों के बिच कभी प्रेम नही रह होगा, फिर कैसे भाई ने बहन पर गोली चालला dii)
दूसरी खबर डेल्ही से थी, पत्नी ने पति का कत्ल कर दिया था।
तीसरी खबर फिर मुम्बैं से थी , बाप ने अपने दो बेटों कि हत्या कर खुदकुशी कर ली, वो अपनी पत्नी कि बेवफाई से परेशान था।
अगली खबर फरीदाबाद से थी, माँ ने बेटे की हत्या कर दी थी,
न जाने ऐसी कई खबरें देश भर में आज दिन भर होती रही होगी। सोचने वाली बात है ऐसा हो क्यों रहा है । क्या हम इतने लालची हो गए हैं कि अब रिश्तों कि क़द्र नही कर सकते, अगर ऐसा नही कर सकते तो फिर क्यों नही पश्चिमी देशों के लोगो की तरह रिश्तों के बारे में हम खुलकर अपने विचार क्यों नही बना पाते।
अब क्यों चिल्ला रहें है लालू जी!
लालू जी कि रैली थी आज पटना में । करीब एक लाख लोग जमा हो गए, पता नही क्यों हुए । लालू जी संख्नाद कर रहे थे। अपनी चेतावनी रैली के मंच से लालू जी कह रहे थे अब बिहार कि जनता जग गयी है, नीतिश सरकार के कुशासन की पोल खुलेगी। लालू जी ने कहा कि नीतिश सरकार के खिलाफ चार्जशीट बनाए हुए है, नीतिश काल में हजारों अपहरण और अपराध का हिसाब रखे हुए हैं। अब लालू जी आपको याद दिलाते चले कि आपकी सरकार को गए ज्यादा दिन नही हुए हैं, जब पुरा बिहार बदनाम था। अब कुछ सुधर रहा है, तो फिर आप चिल्लाने लगे, १५ साल श्शन किये आप काहे नही कुछ किये, नीतिश जी के दुसरे साल चिल-पों मचाये हुए हैं।
बेटवा का करेगा!
लालू जी अब इ बताइये कि पटना रैली में मंच पर आपके बेतवा को कोण बुलाया था। पहले तो बीबी को पॉलिटिक्स में लॉन्च किये, अब बेटवा सब को मंच से नमस्कार करवा रहे हैं। का इरादा है, puraa ले bitiyegaa का बिहार ko।
क्या सफल रहा रैली?
रैली में बडे शुशासन की बात कर रहे थे लालू जी, लेकिन देखा आपने लालू जी के जाते हीं उनकी भीड़ ने पूरे मैदान और मंच पर तबाही मचा दी। टीवी पर देख कर लग रह था कि रामजी की सेना लंका में तोड़-फोड़ कर रही है। अब आप उनलोगों को ई नहीं बताये थे का कि सब अपना ही माल है, लूट-पाट काहे का।
बेटवा का करेगा!
लालू जी अब इ बताइये कि पटना रैली में मंच पर आपके बेतवा को कोण बुलाया था। पहले तो बीबी को पॉलिटिक्स में लॉन्च किये, अब बेटवा सब को मंच से नमस्कार करवा रहे हैं। का इरादा है, puraa ले bitiyegaa का बिहार ko।
क्या सफल रहा रैली?
रैली में बडे शुशासन की बात कर रहे थे लालू जी, लेकिन देखा आपने लालू जी के जाते हीं उनकी भीड़ ने पूरे मैदान और मंच पर तबाही मचा दी। टीवी पर देख कर लग रह था कि रामजी की सेना लंका में तोड़-फोड़ कर रही है। अब आप उनलोगों को ई नहीं बताये थे का कि सब अपना ही माल है, लूट-पाट काहे का।
Tuesday, 16 October 2007
नरेन्द्र मोदी का 'कल का भारत'!
गुजरात के चुनाव की तैयारी के मद्देनजर भाजपा ने नई दिल्ली में एक सीडी जारी की। नरेन्द्र मोदी को विकास पुरुष के तौर पर दिखाया गया। नाम था 'मोदी का कल का भारत'. लेकिन इस कल के भारत में वाजपेयी जी कहीँ नहीं थे। होते भी कैसे अगर सच कहे तो अपने शाशन के दौरान वाजपेयी जी ने जिन मसलों को भुला दिया शायद मोदी जी के भारत में उन्हें नहीं भूलेगी भाजपा। मसलन राम मंदिर, ३७० और समान नागरिक संहिता। इन्हीं को भुला देने के कारन वाजपेयी जी को अगले चुनाव में हिंदुस्तान की जनता ने भी भुला दिया था। मोदी जी शायद भारत कि जनता कि आशावों पर खरे उतरें । गुजरात में हिंदु सम्मान को स्थापित कर उन्होने इसका संकेत पहले ही दे दिया है।
भारत का हर वो नागरिक (बहुसंख्यक समाज) जो वाजपेयी जी से उम्मीद लगाए था, और धोखा खा गया, एक बार फिर मोदी जी से उम्मीद लगाए हुए है। उसे उम्मीद है कि एक दिन भारत में एक ऐसी सरकार आएगी जो हिंदुओं को भी देश में बिना डरे जीने का माहौल देगी। शायद ऐसे में लोग मोदी जी कि ओर देख रहे हैं।
भारत का हर वो नागरिक (बहुसंख्यक समाज) जो वाजपेयी जी से उम्मीद लगाए था, और धोखा खा गया, एक बार फिर मोदी जी से उम्मीद लगाए हुए है। उसे उम्मीद है कि एक दिन भारत में एक ऐसी सरकार आएगी जो हिंदुओं को भी देश में बिना डरे जीने का माहौल देगी। शायद ऐसे में लोग मोदी जी कि ओर देख रहे हैं।
Monday, 15 October 2007
अमेरिका से पंगा लेने का मतलब...
कल ही आडवानी जी कह रहे थे कि मनमोहन जी सबसे कमजोर पीएम हैं। लेकिन अगले दिन मनमोहन जी ने अमेरिका से हो रहे परमाणु करार को रोकने का फैसला कर सबको हैरत में डाल दिया। सामने लोकसभा का चुनाव है, ऐसे में मनमोहन जी तो जनता को फिर से दुखी करना नही चाहते। वैसे ही बहुन्शंख्यक हिंदु जनता उनकी सर्कार के भगवान् राम को लेकर बयां से अभी तक दुखी है।
लेकिन भैया राम को दुखी करोगे तो एक बार चलेगा भी, लेकिन अमेरिका को दुःखी किया है, भुगतना तो पडेगा ही, कहीँ ना कहीँ तो सजा देगा ही, तैयार रहियेगा। अब अपने नटवर जी को याद करो , बहुत बोल रहे थे इराक वाले मामले पर, क्या हुआ, कहॉ के रह गए, अच्छे खासे नेता हुआ करते थे bechaare।
लेकिन कुछ भी कहिये मनमोहन जी बडे हिम्मत से ये फैसला लिया है। हम तो अब आडवानी जी कि बात पर कभी भी बिस्वास नही करेंगे । मनमोहन जी को कमजोर पीएम कह रहे थे।
लेकिन भैया राम को दुखी करोगे तो एक बार चलेगा भी, लेकिन अमेरिका को दुःखी किया है, भुगतना तो पडेगा ही, कहीँ ना कहीँ तो सजा देगा ही, तैयार रहियेगा। अब अपने नटवर जी को याद करो , बहुत बोल रहे थे इराक वाले मामले पर, क्या हुआ, कहॉ के रह गए, अच्छे खासे नेता हुआ करते थे bechaare।
लेकिन कुछ भी कहिये मनमोहन जी बडे हिम्मत से ये फैसला लिया है। हम तो अब आडवानी जी कि बात पर कभी भी बिस्वास नही करेंगे । मनमोहन जी को कमजोर पीएम कह रहे थे।
Saturday, 13 October 2007
रील और रियल लाइफ के हीरो! एंग्री यौंग मैन कौन?
११ अक्तूबर को एक साथ दो आयोजन थे। रील लाइफ के हीरो अमिताभ बच्चन का ६५वा जन्म्दीन्न और रियल लाइफ के हीरो और समाजवादी नेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की १०५वी । सारे टीवी चैनल दिनभर-अमिताभ को गाते रहे-दिखाते रहे, लेकिन जेपी को बहुत ही कम समय मिला, बस औपचारिकता भर।
अमिताभ के लिए बार-बार कहा गया- एंग्री यौंग मन । लेकिन सही कहा जाये तो इस नाम के हकदार जेपी थे। उन्होने ऎमर्जेंसी के खिलाफ पुरे देश के युवावो को खड़ा किया। समाजवादी राजनिती को पहचान दिलाई और सत्ता मोह से कभी बंधाते हुए नही दिखे। गाँधी के बाद भारत को वैसा बेटा नही मिला। लेकिन अपनी जनता(टीवी चंनेलो के लिए दर्शक) को नकली हीरो को पूजने की अदात है, और चैनल को यही बेचना है।
अमिताभ के लिए बार-बार कहा गया- एंग्री यौंग मन । लेकिन सही कहा जाये तो इस नाम के हकदार जेपी थे। उन्होने ऎमर्जेंसी के खिलाफ पुरे देश के युवावो को खड़ा किया। समाजवादी राजनिती को पहचान दिलाई और सत्ता मोह से कभी बंधाते हुए नही दिखे। गाँधी के बाद भारत को वैसा बेटा नही मिला। लेकिन अपनी जनता(टीवी चंनेलो के लिए दर्शक) को नकली हीरो को पूजने की अदात है, और चैनल को यही बेचना है।
Wednesday, 10 October 2007
महान चे ग्वेरा आज भी जिन्दा है।...
महान क्रांतिकारी चे ग्वेरा की चालिस्वी पुन्यातिथी पर पुरी दुनिया याद कर रही है । मेरे लिए तो इस इन्सान का व्यक्तित्व दुनिया में सबसे ज्यादा प्रेरणादायक रही है । महज ३३ साल की उमर में ये इन्सान क्यूबा का उद्योग मंत्री बन चुका था , चाहता तो एक सम्पन्न जिन्दगी जीं सकता था। लेकिन इसने उसे ठुकरा कर जंगल में रहकर गरीबों के अधिकार की लड़ाई लड़ने का रास्ता चुना । बहुत ज्यादा नही जनता इस इन्सान के बारे में मैं लेकिन बहुत prayas karta huu कि इसकी सख्शियत को पहचानी जाये। इसने एक ऐसी लातिन अमेरिका बनैने का प्रयास किया जो आज हुगो चवेज के ब्राजील, फिदेल कास्त्रो के क्यूबा और लूला दी सिल्वा के वेनेजुएला के रुप में सामने आया है। इतना बड़ा अमेरिका है । जो पुरी दुनिया पर राज कर रहा है लेकिन वही बगल में ये सारे देश आज आज़ाद सोच रखते है ।
सब उस आज़ाद ख़्याल क्रान्ति के बेटे की देन्न है। सलाम तुजे और तेरे हिम्मत को।
सब उस आज़ाद ख़्याल क्रान्ति के बेटे की देन्न है। सलाम तुजे और तेरे हिम्मत को।
Sunday, 7 October 2007
कर्नाटक और पाकिस्तान का लोकतंत्र !
आज ही दो जगह से खबर आई । पाकिस्तान में जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने फिर से राष्ट्रपति का चुनाव जीत लिया। और कर्णाटक में बीजेपी ने कुमारस्वामी सरकार से समर्थन वापस ले लिया है । दोनो जगह लोकतंत्र के अलग रुप दिखे। पाकिस्तान में जहाँ लोकतंत्र मजबूत हुआ वही हिंदुस्तान में(कर्णाटक में) जनता दल एस ने लोकतंत्र का बड़ा ही घिनौना चरित्र सामने रखा । साथ ही भारत के संविधान को एक करारा तमाचा भी मारा।
पाकिस्तान में लोकतंत्र जीता!
हम पाकिस्तान में लोकतंत्र कि खराब हालत पर बडे खुश होते हैं, लेकिन वह लोकतंत्र और लोक का ही दबाव है की आज मुशर्रफ़ फिर राष्ट्रपति तो बनने में सफल जरूर हुए लेकिन उसके पहले सेना प्रमुख कि गड्डी छोड़ने का फैसला करना पड़ा। कियानी को सेना प्रमुख नियुक्त करना पड़ा। लोकतंत्र की इसी aandhii में benjeer ने भी अपने लिए कही ना कही रास्ता बाना लिया है । और जल्द ही पाकिस्तान लौटे वाली हैं ।
कर्नाटक में हारा!
कई दिनों कि बात-चीत के बाद आखिरकार आज भाजपा ने कुमारस्वामी की सर्कार से समर्थन वापस ले लिया। कभी देश के प्रधानमंत्री रहे देवेगौडा ने बेटे कुमारस्वामी को सीएम बनवाने के लिए फिर वही खेल खेलना चाहा जो उन्होने २० माह पहले कॉंग्रेस की धर्म सिंह सरकार के साथ खेला था। आज उन्होने उस भाजपा हो भी गच्चा दे दिया जो उस समय उनकी khevanhaar बनी थी। कभी उत्तर प्रदेश में सत्ता के दिनों के बटवारे मे मायावती से धोखा खा चुकी भाजपा इस बार सतर्क थी । और साफ कहा की हम नही तो तुम भी नही । ना तुम्हारी सरकार रहेगी और ना मेरी ।
दोनो का अंतर
कर्णाटक की जनता के सामने साफ है की उनके नेता सत्ता का मजा लेने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। कुमारस्वामी और उनके पापा जी आज तक जिस भाजपा के साथ सरकार में साथ चल रहे थे आज उसी के बारे में उनका कहना है कि वे सांप्रदायिक पार्टी को सत्ता नही सौप सकते । अच्छा है की पाकिस्तानी जनता अपनी मांगो के लिए सडकों पर उतरने लगी है । लग रहा है की कोई बड़ा बदलाव आएगा , और अगर सेना वहा मजबूत रहे तो ज्यादा बदलाव होगा । भारत में भी यही हाल रहा तो एक दिन ट्रस्ट हो जनता को सड़क पज उतरना होगा।
पाकिस्तान में लोकतंत्र जीता!
हम पाकिस्तान में लोकतंत्र कि खराब हालत पर बडे खुश होते हैं, लेकिन वह लोकतंत्र और लोक का ही दबाव है की आज मुशर्रफ़ फिर राष्ट्रपति तो बनने में सफल जरूर हुए लेकिन उसके पहले सेना प्रमुख कि गड्डी छोड़ने का फैसला करना पड़ा। कियानी को सेना प्रमुख नियुक्त करना पड़ा। लोकतंत्र की इसी aandhii में benjeer ने भी अपने लिए कही ना कही रास्ता बाना लिया है । और जल्द ही पाकिस्तान लौटे वाली हैं ।
कर्नाटक में हारा!
कई दिनों कि बात-चीत के बाद आखिरकार आज भाजपा ने कुमारस्वामी की सर्कार से समर्थन वापस ले लिया। कभी देश के प्रधानमंत्री रहे देवेगौडा ने बेटे कुमारस्वामी को सीएम बनवाने के लिए फिर वही खेल खेलना चाहा जो उन्होने २० माह पहले कॉंग्रेस की धर्म सिंह सरकार के साथ खेला था। आज उन्होने उस भाजपा हो भी गच्चा दे दिया जो उस समय उनकी khevanhaar बनी थी। कभी उत्तर प्रदेश में सत्ता के दिनों के बटवारे मे मायावती से धोखा खा चुकी भाजपा इस बार सतर्क थी । और साफ कहा की हम नही तो तुम भी नही । ना तुम्हारी सरकार रहेगी और ना मेरी ।
दोनो का अंतर
कर्णाटक की जनता के सामने साफ है की उनके नेता सत्ता का मजा लेने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। कुमारस्वामी और उनके पापा जी आज तक जिस भाजपा के साथ सरकार में साथ चल रहे थे आज उसी के बारे में उनका कहना है कि वे सांप्रदायिक पार्टी को सत्ता नही सौप सकते । अच्छा है की पाकिस्तानी जनता अपनी मांगो के लिए सडकों पर उतरने लगी है । लग रहा है की कोई बड़ा बदलाव आएगा , और अगर सेना वहा मजबूत रहे तो ज्यादा बदलाव होगा । भारत में भी यही हाल रहा तो एक दिन ट्रस्ट हो जनता को सड़क पज उतरना होगा।
Saturday, 6 October 2007
छुट्टी दिलाने वाले महात्मा जी !
अभी-अभी दो अकटूबर बिता है, क्या रौनक थी यार उस दिन। समाचार चैनल वाले गांधीजी का बखान कर रहे थे । फिल्म चैनल वाले गाँधी जी के ऊपर बनी फिल्मे दिखा रहे थे । नेता जी लोग भी सुबह से hii khaadi pehan कर chahak रहे थे । Delhi से लेकर sanyukta राष्ट्र तक mein गाँधी जी के vichaaron की baarh ला dii गयी। सारे नेता जी लोग जगह-जगह यात्राएँ निकाल रहे थे । बोले तो हर जगह गंधिगिरी छा गयी थी मामू।
मैंने भी अपने घर फ़ोन पर बात की । फ़ोन मेरे छोटे भई ने उठाई । बड़ा खुश लग रहा था , मैंने पूछा अरे भई बात क्या है , आज बडे खुश दिख रहे हो । बोला आज महात्मा जी का जन्मदिन है भैया । मैंने सोचा यार ८ साल के लड़के को महात्मा जी से क्या वास्ता । उसने कहा अरे आज छूट्टी है आज छूट्टी दिलाने वाले महात्मा जी का जन्मदिन है । मेरे एक मित्र भी बडे खुश दिख रहे थे, sarakari naukari mein hai मैंने पूछा भाई क्या बात है, बडे खुश दिख रहे हो । बोले आज गाँधी जी कि kripaa से छुट्टी पर hu।
मैंने भी अपने घर फ़ोन पर बात की । फ़ोन मेरे छोटे भई ने उठाई । बड़ा खुश लग रहा था , मैंने पूछा अरे भई बात क्या है , आज बडे खुश दिख रहे हो । बोला आज महात्मा जी का जन्मदिन है भैया । मैंने सोचा यार ८ साल के लड़के को महात्मा जी से क्या वास्ता । उसने कहा अरे आज छूट्टी है आज छूट्टी दिलाने वाले महात्मा जी का जन्मदिन है । मेरे एक मित्र भी बडे खुश दिख रहे थे, sarakari naukari mein hai मैंने पूछा भाई क्या बात है, बडे खुश दिख रहे हो । बोले आज गाँधी जी कि kripaa से छुट्टी पर hu।
Sunday, 30 September 2007
लोकतंत्र समर्थकों को मारते ये ङ्रैकुला !
सुना था किसी द्रकुला नाम के पात्र के बारे में जो लोगो को जिन्दा जल्वान कर खुश होता था। ऐसे कई द्रकुला आजकल एशिया में पैदा हो गए है। वो लोकतंत्र की मांग करने वालों को मार रहे है. भारत के आस-पास के देशों में लोकतंत्र का हाल देखिए । पाकिस्तान, अफ़्गानिस्तान, म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड, बंगलादेश! ये सारे भारत के पड़ोसी देश है और इन सभी देशों में लोकतंत्र के लिए लड़ाई चल रही है। कल ही खबर आयी थी कि म्यांमार में सैन्य सरकार ने विरोध दबाने के लिए गोलिया चलवाई , ९ लोग मारे गए । वहा के सारे विपक्षी नेता जेल में हैं । और अब बौध भिक्षु भी जेल में ठूंसे जा रहे हैं ।
पकिस्तान में सारे बारे नेता देश से बाहर भगा दिए गए है । और बंगलादेश में सारे बडे नेता जेल में बंद है । नेपाल में लड़ाई अभी भी नही थमी है । थैलंद के प्रधानमंत्री किसी और देश में छुपे हुए है । इराक और अफगानिस्तान में लड़ाई चल ही रही है । लोकतंत्र के नाम पर जारी लड़ाई का आलम ये है की हर आम आदमी नही जनता है कब उसके घर पर कही से कोई बम आकर गिरे और वो मारे जाये ।
पकिस्तान में सारे बारे नेता देश से बाहर भगा दिए गए है । और बंगलादेश में सारे बडे नेता जेल में बंद है । नेपाल में लड़ाई अभी भी नही थमी है । थैलंद के प्रधानमंत्री किसी और देश में छुपे हुए है । इराक और अफगानिस्तान में लड़ाई चल ही रही है । लोकतंत्र के नाम पर जारी लड़ाई का आलम ये है की हर आम आदमी नही जनता है कब उसके घर पर कही से कोई बम आकर गिरे और वो मारे जाये ।
सब क्रेडिट का खेल: रोजगार गारंटी , राम सेतु और २०-२० !
क्रेडिट कार्ड के ज़माने में हर आदमी के लिए जरूरी है कि वो अपने लिए कुछ-कुछ क्रेडिट बनाता रहे । बिना क्रेडिट के क्या रखा है जीने में । इस मामले मे अगर आम लोगो को कुछ सीखना है तो हमारे नेताओं से सीखें .
पहले बात राम की !
अब राम जी को भुला चुके उनके हिंदुत्ववादी भाइयो ने जब देखा की फिर राम जी दक्षिण भारत में अवतार लेने वाले है लग लिए अपनी क्रेडिट बनाने में । जगह-जगह पोस्टर जलने लगे और धरना देने लगे । साबका कुछ ना कुछ क्रेडिट बन्ने लगा और साथ ही अगले चुनाव के लिए नए पोस्टर बन्ने लगे । अब अपको बताते है की पोस्टर में कोण-कोण से लोग छपे । बीच में हाथ उठाये सम्भावीत उम्मीदवार , उसके ऊपर राम जी कि तस्वीर , एक तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेताओ के फोटो ।
२०-२०
२०-२० कप जीत कर लौटी टीम(सच बोले तो कप, खिलारी तो बेचारे पीछे ही रह गए) के साथ फोटो खिच्वाने के लिए मुम्बई में लगे मेले को तो आप देख ही चुके है । कई नेता जी लोग अपना क्रेडिट बना गए ।
आख़िर में रोजगार गारंटी!
सरकार ने एक योजना बनाई , सभी ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी देने की । पहले इसे १०० जिलों में लागू किया गया । एक दिन अचानक राजकुमार अपनी टोली के साथ पहुंच गए प्रधानमंत्री महोदय के पास और माँग की कि इसे देश के सभी जिलों में लागू किया जाये । उन्होने इसे मान लिया और कहा देश के सभी युवाओं को ऐसे ही अछे काम करने चाहिऐ । अब मैं ये पूछता हू कि अगर kisi आम yuva ने ये माँग की होती तो आप इसे इतनी आसानी से मानते और अगर मानते भी तो उसका क्रेडिट क्या उसे ही देते ।
सच कहे तो बात हर जगह क्रेडिट बटोरने की है । और वो क्रेडिट भी हर आम आदमी की किस्मत में कहॉ है ।
पहले बात राम की !
अब राम जी को भुला चुके उनके हिंदुत्ववादी भाइयो ने जब देखा की फिर राम जी दक्षिण भारत में अवतार लेने वाले है लग लिए अपनी क्रेडिट बनाने में । जगह-जगह पोस्टर जलने लगे और धरना देने लगे । साबका कुछ ना कुछ क्रेडिट बन्ने लगा और साथ ही अगले चुनाव के लिए नए पोस्टर बन्ने लगे । अब अपको बताते है की पोस्टर में कोण-कोण से लोग छपे । बीच में हाथ उठाये सम्भावीत उम्मीदवार , उसके ऊपर राम जी कि तस्वीर , एक तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेताओ के फोटो ।
२०-२०
२०-२० कप जीत कर लौटी टीम(सच बोले तो कप, खिलारी तो बेचारे पीछे ही रह गए) के साथ फोटो खिच्वाने के लिए मुम्बई में लगे मेले को तो आप देख ही चुके है । कई नेता जी लोग अपना क्रेडिट बना गए ।
आख़िर में रोजगार गारंटी!
सरकार ने एक योजना बनाई , सभी ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी देने की । पहले इसे १०० जिलों में लागू किया गया । एक दिन अचानक राजकुमार अपनी टोली के साथ पहुंच गए प्रधानमंत्री महोदय के पास और माँग की कि इसे देश के सभी जिलों में लागू किया जाये । उन्होने इसे मान लिया और कहा देश के सभी युवाओं को ऐसे ही अछे काम करने चाहिऐ । अब मैं ये पूछता हू कि अगर kisi आम yuva ने ये माँग की होती तो आप इसे इतनी आसानी से मानते और अगर मानते भी तो उसका क्रेडिट क्या उसे ही देते ।
सच कहे तो बात हर जगह क्रेडिट बटोरने की है । और वो क्रेडिट भी हर आम आदमी की किस्मत में कहॉ है ।
Saturday, 29 September 2007
अब हैमरमैन के आतंक के साए में 'दिल्ली'
लो फिर ड़र गए दिल्ली वाले। '
हैमरमैन ने ली एक और की जान'
किसी अखबार ने यही लिखा था अपने पहले पेज पर । अब अन्दर की कहानी सुनिये । पुलिस का कहना था की एक युवती सोई हुई थी और कोई आदमी वहा आया और और उसके सर पर वार कर भाग गया । युवती की शादी पिछ्ले माह हुई थी और उसकी विदाई होने वाली थी । लोगो ने कहा ये उसी हैमरमैन का काम है जिसने अब तक दिल्ली में कई महिलाओ के सर पर हथ्हौरे से वार किया है। पुलिस इस कहानी को नही मान रही है और शक में पड़ोस के एक लड़के को गिरफ्तार किया है । अब अगर पुलिस लोगो और मीडिया कि खबर को मानकर जांच करने लगे तो ना तो हैमरमैन पकड़ा जाएगा और ना ही असली aaropii । पुलिस को लड़की के पास से ईट मिल है और पेपर वाले खबर दे रहे की हैमरमैन की करतूत । अरे यार डरे हुए दिल्ली वालों को और क्यों डरा रहे हू यार । अभी अभी तो बेचारे घर के बहार से पाच उन्गालियीओ की निशां मिटाया है इन्होने । सुना नही था आपने क्या जब घरो में में मांगने वालो के भेष में चुरैलें आ रही थी ।
कुछ साल पहले जब दिल्ली में नही रहता था तब कई दिनों तक दिल्ली की एक खबर छपती रही। पड़कर दर लगता था। लोहे के बन्दर की कहानी । जो लोगो पर हमले कर्ता था । उत्तर प्रदेश के कई जिलों मे मुह नोच्वा ने कई महिनो तक आतंक मचाये रखा था . पता नही ये सारे कहॉ से आते हैं।
हैमरमैन ने ली एक और की जान'
किसी अखबार ने यही लिखा था अपने पहले पेज पर । अब अन्दर की कहानी सुनिये । पुलिस का कहना था की एक युवती सोई हुई थी और कोई आदमी वहा आया और और उसके सर पर वार कर भाग गया । युवती की शादी पिछ्ले माह हुई थी और उसकी विदाई होने वाली थी । लोगो ने कहा ये उसी हैमरमैन का काम है जिसने अब तक दिल्ली में कई महिलाओ के सर पर हथ्हौरे से वार किया है। पुलिस इस कहानी को नही मान रही है और शक में पड़ोस के एक लड़के को गिरफ्तार किया है । अब अगर पुलिस लोगो और मीडिया कि खबर को मानकर जांच करने लगे तो ना तो हैमरमैन पकड़ा जाएगा और ना ही असली aaropii । पुलिस को लड़की के पास से ईट मिल है और पेपर वाले खबर दे रहे की हैमरमैन की करतूत । अरे यार डरे हुए दिल्ली वालों को और क्यों डरा रहे हू यार । अभी अभी तो बेचारे घर के बहार से पाच उन्गालियीओ की निशां मिटाया है इन्होने । सुना नही था आपने क्या जब घरो में में मांगने वालो के भेष में चुरैलें आ रही थी ।
कुछ साल पहले जब दिल्ली में नही रहता था तब कई दिनों तक दिल्ली की एक खबर छपती रही। पड़कर दर लगता था। लोहे के बन्दर की कहानी । जो लोगो पर हमले कर्ता था । उत्तर प्रदेश के कई जिलों मे मुह नोच्वा ने कई महिनो तक आतंक मचाये रखा था . पता नही ये सारे कहॉ से आते हैं।
Friday, 28 September 2007
कप जीत कर लाओ, फिर कुछ मांगो
अभी हाल ही मे हमारे कापर मंत्री जी का बयाँ आया था विदर्व के किसानो को लेकर । उन्होने गुजरात के किअसनो कि प्रसंषा करते हुए कहा था की वे बडे मेहनती है। और विदर्व के किसान कामचोर। इसी कारन विदर्व के किसान आत्महत्या करते है। एक और बयाँ आया है कर्णाटक के मुख्यमंत्री जी का । हॉकी खिलारी जब नाराज हो भूख हरताल पर जाने लगे तो सी एम् साहब ने कहा की वर्ल्ड कप लाओ तो क्रिकेट खिलारिओं कि तरह इन्नाम बतेंगे । दोनो बयाँ एकदम बराबर लगते हैं।
किसानो की बात उठी है तो कहते चले कि ट्वेंटी-२० वर्ल्ड कप जीत कर लौटी टीम इंडिया के स्वागत के लिए मुम्बई में जो नेताओ का जो मंच सजा था । उस मंच पर सबसे आगे बी सी सी आई के अध्यक्ष और देश के कृषि मंत्री साहब सबसे आगे मंच पर विराजमान थे । अब कल को कही वो भी नही कह दे कि भाई किसान लोग सरकार से हमेशा कुछ ना कुछ मांगते रहते हो। कभी कोई वर्ल्ड कप जीत कर लाओ फिर सरकार से मदद मांगने आना । नेता जी को कप उठा कर फोटो खिचाने से फुर्सत मिलेगी तभी तो किसानो के बारे में सोचेंगे ना।
किसानो की बात उठी है तो कहते चले कि ट्वेंटी-२० वर्ल्ड कप जीत कर लौटी टीम इंडिया के स्वागत के लिए मुम्बई में जो नेताओ का जो मंच सजा था । उस मंच पर सबसे आगे बी सी सी आई के अध्यक्ष और देश के कृषि मंत्री साहब सबसे आगे मंच पर विराजमान थे । अब कल को कही वो भी नही कह दे कि भाई किसान लोग सरकार से हमेशा कुछ ना कुछ मांगते रहते हो। कभी कोई वर्ल्ड कप जीत कर लाओ फिर सरकार से मदद मांगने आना । नेता जी को कप उठा कर फोटो खिचाने से फुर्सत मिलेगी तभी तो किसानो के बारे में सोचेंगे ना।
दे दनादन: लूट सको तो लूट लो
टीम इंडिया चैम्पियन होकर लौटी है , स्वागत के लिए पूरी मुम्बई सडकों पर उतर गयी । सबसे ज्यादा ख़ुशी तो हमारे नेताओ को थी । स्वागत करने के लिए उन्होने मंच पर सबसे आगे कि सीट कब्जा ली । मंच पर खिलाडी कम दिख रहे थे और नेता ज्यादा । हर तरफ नेता ही नेता दिख रहे थे । inaamon कि बरसात हो रही थी और साथ ही विश्वविजेता होने का शंखनाद भी। नेताओं की भिड़ में बस हमारे कप्तान को ही अगली पंक्ति में जगह मील पाई। अगर वो भी कप्तान नही होते तो फिर देखते कैसे आगे बैठता ।
अरे भाई कप लाए चलो अच्छा किया । लेकिन ऐसा थोड़े ही होता है कि उसे लेकर तुम्ही देश भर में घुमोगे . ला दिए तुम्हारा काम ख़त्म अब उसे नेता जी को दे दो . चुनाव प्रचार में काम आएगा . हां तुम्हे जब-जब मंच पर बुलाया जाये पहुच जान. टीम में रहना है की नही.
अरे भाई कप लाए चलो अच्छा किया । लेकिन ऐसा थोड़े ही होता है कि उसे लेकर तुम्ही देश भर में घुमोगे . ला दिए तुम्हारा काम ख़त्म अब उसे नेता जी को दे दो . चुनाव प्रचार में काम आएगा . हां तुम्हे जब-जब मंच पर बुलाया जाये पहुच जान. टीम में रहना है की नही.
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