Tuesday, 26 May 2009

राजनीति की बहती गंगा और पत्रकार हीथर ब्रुक!

कौन है ये हीथर ब्रुक! एक ब्रिटिश पत्रकार! मैंने आज पहली बार ये नाम सुना। अब आप पूछियेगा कि क्या किया है इस पत्रकार ने जो मैं इसके बारे में इतना ज्यादा बात कर रहा हुं...तो इसका जवाब है कि आज के जमाने में जब राजनीति और पत्रकारिता को लोग एक ही थैली के चट्टे-बट्टे मानने लगे हैं...ऐसे समय में इस पत्रकार ने राजनीति के गलियारों में लाभ की बहती गंगा और उसमें हाथ धोते राजनीतिक लोगों की सच्चाई सामने लाने की हिम्मत की है...और ऐसा करने के लिए उसने कोई चमत्कार नहीं किया है...
इस पत्रकार ने संसद के तमाम दस्तावेजों को खंगाल कर कई सारे खुलासे किये हैं। मसलन वहां के सांसद अपने भत्ते बटोरने के लिए क्या-क्या हथकंडे अपनाते हैं। जो तथ्य मिले, वे चौंकाने वाले हैं। अपने भत्ते लेने के लिए किसी ने हेलिपैड मरम्मत का खर्च दिखाया है, तो किसी ने टेनिस कोर्ट या स्विमिंग पूल के रखरखाव का। अनेक सांसदों ने दो-दो मकानों के किराए की रसीद पेश की है, इस तर्क के साथ कि दो मकान रखना उनकी मजबूरी है- एक अपने चुनाव क्षेत्र में और दूसरा राजधानी लंदन में। हीथर ब्रुक के इस रहस्योद्घाटन ने ब्रिटेन के नागरिकों को बेचैन कर दिया है। लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि आर्थिक मंदी के इस दौर में जब सामान्य नागरिक अपने परिवार के लिए एक छोटी सी रिहायश का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं, सांसदों की इस फिजूलखर्ची का क्या मतलब है? आखिर वे पैसे आम नागरिकों द्वारा दिए जाने वाले टैक्स से ही खर्च किए जा रहे हैं। क्या वे सचमुच तंगहाल जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं? कुछ सांसदों ने अपने खर्चों में एलसीडी टीवी या झाड़-फानूस जैसी सजावटी चीजों का भी बिल भरा है, तो कुछ ने पॉर्न फिल्मों की सीडी और घोड़े की लीद उठाने वाले थैलों तक की खरीद की रसीद लगा रखी है। इतने सारे ऐशो-आराम, जाहीर है वहां के जनप्रतिनिधि भी खुद को राजा-महाराजा, आम लोगों से श्रेष्ठ, सुपर सिटिजन समझते हैं।
क्या हमारे यहाँ भी यही माहौल नहीं है। आम नागरिकों को इसकी जानकारी नहीं होती, दुनिया में कहीं भी नहीं. हीथर ब्रुक को भी ये जानकारी प्राप्त करने के लिए ५ साल तक गोपनीयता कानून के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ी. सांसदों और मंत्रियों के खर्चों के बारे में जनता को जानकारी नहीं दी जाती, वहीँ नहीं कहीं भी नहीं. वहां अब इस मामले पर आवाज उठने लगी है, लोग इन खर्चों पर बहस करने लगे हैं, विभिन्न सामाजिक संगठन अभियान चला रहे हैं। हीथर ब्रुक के प्रयासों ने राजनीतिक लूट के प्रति जनता को जागरूक कर दिया है. हमारे यहाँ भी सरकार ने जनता को सूचना का अधिकार दिया है. जनता आज नहीं तो कल इसका इस्तेमाल करेगी और ये तो बस एक शुरुआत है.
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एक जानकारी जो हमें ख़बरों कि तलाश के दौरान इन्टरनेट पर मिली...{{राजनीति शास्त्र के एक यूरोपियन प्रोफेसर पीयरे लेम्फिक्स कहते हैं कि राजनीतिज्ञों और वेश्याओं के बारे में पुरानी कहावत अब बदल चुकी है, क्योंकि वेश्याएं आज भी वही बेचती हैं, जो उनका है, पर राजनीतिज्ञ उसका सौदा करते हैं, जो उनका नहीं है।}}

3 comments:

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

बहुत अच्छी पोस्ट! भारत में पत्रकार अक्सर सच को सामने लाते हैं लेकिन मेरा लम्बा अनुभव कहता है की भारत में कुछ नहीं बदलता. कुछ दिन हो-हल्ला होता है, फिर सब भुला दिया जाता है.
हिंदी में प्रेरक कथाओं और संस्मरणों का एकमात्र ब्लौग http://hindizen.com ज़रूर देखें.

सतीश पंचम said...

यही सब भारत में भी होता है।

तख्त मिला हो तो तख्तियां बदलने में आसानी रहती है।

दो घर किसलिये पूछा जाएगा तो कह देंगे - वो दो घर नहीं है। एक मेरा घर है और दूसरा जन संपर्क कार्यालय। और तीसरा वो जो बन रहा है वह जन सेवा हेतु विश्रामस्थली है।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

देखा ! यूं ही हमारे नेता अकेले बदनाम हुए जा रहे थे.