Wednesday, 27 July 2011

ना जाने कब तक...


Two Faces of India
ना जाने क्या होगा...
नाउम्मीदियों-दुश्वारियों के इस देश में
ना जाने अभी और कितने इतिहास
लिखे जाएंगे तबाही और बरबादियों के.
ना जाने कितने  एवरेस्ट
अभी और तैयार होंगे
घोटालों, भ्रष्टाचार व आतंकी वारदातों के
इस महान भारत देश में।
.

ना जाने कब तक
पाये जाते रहेंगे
इस देश में गरीब और पिछड़े
जिनके साथ फोटो खिंचवाकर
नेता साबित करते रहेंगे
खुद को महान।
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ना जाने कब तक
कालाहांडी और बुदेलखंड की सूखी-बंजर जमीन
सींचती रहेगी देश की राजनीति को।
कब तक सरकारी व्यवस्था की
अयोग्यता व अकर्मण्यता
ढकी जाती रहेगी
मुआवजों के लिहाफ से।
.
गांधी के इस देश में
न जाने कब तक
नियम-कायदों और फाइलों के ढेर में
पीसती रहेंगी हमारी पीढियां
और जड़ होती व्यवस्था को ढोते रहेंगे हम।
.
और न जाने कब तक
ऐसे ही चलता रहेगा सबकुछ
और हम कहलवाते रहेंगे
खुद को
सभ्य, सुसंस्कृत और महान।

1 comment:

गुस्ताख़ मंजीत said...

eutopian poetry likhna band karo. kavita acchi hai ..lekin