कश्मीर सिंह और किशन सिंह में कई समानताये हैं। मसलन दोनों भारतीय हैं। दोनों आजकल चर्चा में हैं। एक लंबे अरसे के बाद आजकल दोनों अपने "घर" पर हैं। लेकिन कश्मीर सिंह घर वापस लौटकर खुश है वही किशन सिंह घर वापस पहुँच कर दुखी है। कश्मीर सिंह के मामले पर सरकार खामोश है तो किशन सिंह के मामले पर संसद में भी चर्चा हुई है। कई समानताओं के साथ-साथ इन दोनों के बीच कई अंतर भी है।
पहले हम कश्मीर सिंह की बात करते हैं। कश्मीर सिंहकी उम्र अब ६० साल है। उनकी कहानी थोडी भावुक है- वे पंजाब के रहने वाले हैं, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में पकड़े गए, उनपर जासूसी का आरोप लगा, उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। उन्होंने ३५ साल पाकिस्तान की जेलों में गुजारा। फ़िर उन्हें माफ़ी मिली और अब वे आज़ाद होकर अपने परिवार के बीच खुशी से वापस लौट आए हैं।
किशन सिंह की उम्र ३७ साल है। वे एक भारतीय हैं, और भारत में ही रहे। लेकिन आम भारतीयों की तरह वे नहीं है क्यूंकि वे बिहार के रहने वाले हैं। वे भारत के अन्दर बसे एक "दूसरे मुल्क" में पकड़े गए। और वहाँ के बासिंदों के अत्याचार के शिकार हो गए। अपनी ३७ साल की उम्र में से उन्होंने २७ साल अपने प्रान्त बिहार में gujaare और आखिरी १० साल महाराष्ट्र में। बिहार के सिवान जिले के अपने गाँवको छोड़कर १० साल पहले वे पुणे चले गए। वहाँ उन्होंने चने बेचने का काम शुरू किया। चने बेचने से उनकी इतनी कमाई नहीं होती थी अपना घर खरीद सके या किराए पर ले सके। इसलिए वे दिनभर चने बेचते और जब सारी दुनिया अपने घर को वापस लौट जाती तो वे सड़क किनारे फुटपाथ पर सो जाते। उन्हें लगता था की अपने देश में ही हैं। और उन्हें कोई खतरा नहीं है। उन्होंने संविधान में कहीं पढ़ा तो नहीं था की उन्हें देश के किसी भी हिस्से में जाकर रहने और रोजी रोटी के लिए कोई काम करने का अधिकार है। लेकिन पता नहीं कहाँ से उन्हें ये मालूम था की वे ऐसा कर सकते हैं। लेकिन वे चैन से अपना ये काम नहीं कर सके। पिछले महीने की एक रात उनपर और उन जैसे काम करने वाले और फुटपाथ पर जीवन गुजारने वाले लोगों पर भीड़ ने हमला किया। भागते वक्त वे गिरे और बेहोश हो गए और फ़िर जब होश में आए तो उनके दोनों हाथ गायब थे। अब वे चने नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि हाथ के बिना चने बेचने का काम सम्भव नहीं है। मामला संसद में भी उठा, गृहमंत्री महोदय ने कहा की ऐसे हमलों के शिकार सभी लोगों को फ़िर से बसाया जाएगा। लेकिन क्या किशन सिंह को फ़िर से बसाया जा सकता है। भले ही किशन सिंह कश्मीर सिंह की तरह दूसरे मुल्क में नहीं पकड़े गए थे, उन्होंने संविधान के अनुसार कोई अपराध भी नहीं किया था लेकिन क्या करें मुल्क के अन्दर कई मुल्कों को वे पहचान नहीं पाए और यही उनका अपराध था.......
2 comments:
कुछ चिरकुट नेताओं के कारण पुरा देश शमॆसार हो गया है। आम आदमी करें तो क्या करें। इन नेता लोगों को बिना मांगे ही वह सबकुछ दे दिया जाना चाहिए जो इन्हें इस तरह की राजनिति करने के बाद हासिल होगा, वरना से इस देश को नरक बना देगें। बहुत अच्छे....
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keep it up
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